नगर पालिका चुनाव काउंट डाउन : वार्ड 1 में मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा हावी, मतदाता बोले-काम करने वाले को देंगे वोट
ललित चावला बिजौलिया | 24 Aug 2026
मेरा वार्ड, मेरा प्रत्याशी
आज ग्राउंड जीरो से रूबरू हैं वार्ड की जनता
वार्ड नंबर 1 |
क्षेत्र : बालाजी चौराहा से होते हुये सीनीयर हायर सैकेण्ड्री स्कूल से जावदा रोड़ पर उत्तर दिशा की समस्त आबादी इन्द्रा कोलोनी, अटल कोलोनी, आदित्य नगर, बालाजी नगर, प्रगति नगर व केशु विलास की समस्त आबादी
सीट : एसटी महिला
वोटर : 739
पुरुष : 360
महिला : 379
बिजौलिया। नगर पालिका चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। पहली बार नगर पालिका चुनाव को लेकर 25 वार्डों में राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इसी बीच CNX डिजिटल की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट में आज बात वार्ड नंबर 1 के मतदाताओं की, जहां चुनावी चर्चा से ज्यादा लोगों के बीच पानी, सड़क, नाली और विकास जैसे मूलभूत मुद्दे प्रमुखता से सामने आ रहे हैं। वार्ड नंबर 1 को एसटी महिला के लिए आरक्षित किया गया है। आरक्षण के बाद संभावित प्रत्याशियों को लेकर भी राजनीतिक दलों में मंथन शुरू हो गया है।
केशूविलास के मतदाता बनेंगे अहम कड़ी
कस्बे के नजदीक स्थित पूर्व लक्ष्मीखेड़ा पंचायत का केशूविलास गांव अब नगर पालिका क्षेत्र में शामिल होकर वार्ड नंबर 1 का हिस्सा है। ऐसे में गांव के मतदाता इस वार्ड के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आ रही चर्चाओं के अनुसार इंदिरा कॉलोनी में यादव मतदाता तथा केशूविलास क्षेत्र के भील और मीणा मतदाताओं की भूमिका चुनाव में निर्णायक हो सकती है। वहीं वार्ड एसटी महिला के लिए आरक्षित होने से प्रमुख राजनीतिक दलों की नजर संभावित प्रत्याशियों पर टिकी हुई है। वार्ड में एसटी महिला वर्ग के संभावित प्रत्याशियों की संख्या कम होने के कारण भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों को केशूविलास क्षेत्र से मजबूत चेहरा मिलने की संभावना पर विचार करना पड़ सकता है।
चंबल की पाइपलाइन, फिर भी तीन-चार दिन में पानी
केशूविलास के ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी की है। ग्रामीणों का कहना है कि चंबल परियोजना की पाइपलाइन गांव से होकर गुजर रही है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नियमित पानी नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार करीब तीन-चार दिन के अंतराल में पानी की सप्लाई मिलती है।
ग्रामीण राजेंद्र मीणा का कहना है कि पानी की समस्या के साथ गांव में सड़क और नालियों की स्थिति भी सुधार की मांग कर रही है। अब गांव के नगर पालिका क्षेत्र में शामिल होने के बाद लोगों को उम्मीद है कि शहरी क्षेत्र के साथ जुड़ने से विकास कार्यों को गति मिलेगी और लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान होगा।
बालाजी नगर और प्रगतिनगर में भी पानी का मुद्दा
वार्ड नंबर 1 में शामिल बालाजी नगर और प्रगति नगर के लोग भी मूलभूत सुविधाओं को लेकर अपनी अपेक्षाएं सामने रख रहे हैं। स्थानीय अरविंद सिंह का कहना है कि क्षेत्र में नगर पालिका के मतदाता तो हैं, लेकिन अभी तक पालिका के विकास कार्यों का अपेक्षित लाभ इन कॉलोनियों तक नहीं पहुंचा है। इन कॉलोनियों में भी चंबल के पानी की सप्लाई नहीं होने से लोगों को पेयजल समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वहीं ज्ञान सिंह टांक का कहना है कि चुनाव के समय प्रत्याशी विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन इस बार मतदाता ऐसे प्रत्याशी को चुनना चाहते हैं जो उनकी रोजमर्रा की समस्याओं का ठोस समाधान कराने में सक्षम हो।
इंदिरा कॉलोनी में भी प्रत्याशियों का इंतजार
इंदिरा कॉलोनी में भी चुनावी माहौल बनने लगा है। हालांकि अभी तक यहां से पार्षद पद के लिए एसटी महिला वर्ग में संभावित प्रत्याशियों की संख्या बेहद कम दिखाई दे रही है। यही स्थिति बालाजी नगर और प्रगतिनगर में भी नजर आ रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों द्वारा प्रत्याशियों के नाम सामने आने के बाद वार्ड नंबर 1 की चुनावी तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
मतदाताओं की दो टूक-मुद्दों का समाधान करने वाले को वोट
वार्ड नंबर 1 के मतदाताओं की बात करें तो चुनावी चर्चा में एक बात स्पष्ट दिखाई देती है-मतदाता इस बार सिर्फ वादे नहीं, काम का भरोसा चाहते हैं। पानी, सड़क, नाली और कॉलोनियों के विकास जैसे मुद्दे यहां चुनावी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं। स्थानीय रवि और विश्वास यादव का कहना है कि जो प्रत्याशी उनकी मूलभूत आवश्यकताओं के ठोस समाधान का भरोसा दिलाएगा और क्षेत्र के विकास के लिए काम करने की क्षमता दिखाएगा, उसी के पक्ष में मतदान पर विचार किया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि एसटी महिला के लिए आरक्षित वार्ड नंबर 1 में भाजपा और कांग्रेस किसे अपना प्रत्याशी बनाती हैं और प्रत्याशियों के मैदान में आने के बाद स्थानीय मुद्दों के बीच चुनावी मुकाबला किस दिशा में जाता है। CNX डिजिटल की ग्राउंड जीरो रिपोर्ट में वार्ड नंबर 1 के मतदाताओं की आवाज यही है—“वादा नहीं, समाधान चाहिए।”