पलंग पर जिंदगी और आंखों में इलाज की उम्मीद: सिलिकोसिस पीड़ित की तीन महीने से अटकी 3 लाख की सहायता
ललित चावला बिजौलिया | 14 Aug 2026
विभागों के चक्कर काट रहा परिवार
28 अप्रैल को बन गया सिलिकोसिस प्रमाण पत्र, लेकिन बैंक खाता अपडेट नहीं होने से नहीं मिल रही योजना की राशि
181 पर चार बार शिकायत, जिला क्षय अधिकारी से लेकर निदेशालय तक लगाई गुहार, शिकायतें सिर्फ एक-दूसरे विभाग को होती रहीं फॉरवर्ड
बिजौलिया। करलाव आरोली निवासी एक गरीब सिलिकोसिस पीड़ित की जिंदगी इन दिनों सरकारी व्यवस्था की बेरुखी के बीच अटकी हुई है। गंभीर बीमारी के चलते पीड़ित व्यक्ति चलने-फिरने तक में असमर्थ है और लंबे समय से पलंग पर ही पड़ा है। परिवार को उम्मीद थी कि सिलिकोसिस योजना के तहत मिलने वाली 3 लाख रुपए की सहायता राशि समय पर मिल जाएगी तो किसी अच्छे अस्पताल में इलाज कराया जा सकेगा, लेकिन प्रमाण पत्र जारी होने के करीब चार महीने बाद भी सहायता राशि नहीं मिल पाई है।
आरोली करलाव निवासी पीड़ित शंकर लाल भील ने बताया कि सबसे बड़ी परेशानी यह है कि सिलिकोसिस पोर्टल पर उसका बैंक खाता बड़ौदा राजस्थान क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक का दर्ज है, जबकि वर्तमान में खाते की जानकारी अपडेट कराने की जरूरत है। ई-मित्र के माध्यम से पोर्टल पर बैंक खाता अपडेट करने का प्रयास किया गया तो 'लिमिट क्रॉस' का विकल्प सामने आ रहा है। परिवार का कहना है कि उन्होंने पहले कभी बैंक खाता अपडेट नहीं कराया, इसके बावजूद पोर्टल पर अपडेशन की सीमा समाप्त बताई जा रही है। बताया गया कि बैंक खाता अपडेशन का कार्य संबंधित विभाग के स्तर से ही हो सकता है।
28 अप्रैल को प्रमाण पत्र, फिर शुरू हुआ कार्यालयों का चक्कर
पीड़ित को 28 अप्रैल को सिलिकोसिस प्रमाण पत्र जारी हो चुका है। इसके बाद परिवार को उम्मीद थी कि अब योजना की सहायता राशि मिलने में कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन बैंक खाता अपडेट की तकनीकी समस्या के कारण मामला अटक गया। पीड़ित परिवार की ओर से मई से अब तक 181 पर करीब चार बार शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है। शिकायत जिला क्षय अधिकारी, भीलवाड़ा के पास भेजी गई। वहां से परिवार को फोन आया और बताया गया कि जिला कलेक्टर कार्यालय में खाते को अपडेट करेंगे।
किराए की गाड़ी से कलेक्टर कार्यालय पहुंचा पीड़ित परिवार
परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को लेकर जिला मुख्यालय पहुंचना भी बड़ी चुनौती है। इसके बावजूद पीड़ित को किराए की गाड़ी से समाजसेवी मोहन गुर्जर द्वारा जिला कलेक्टर कार्यालय भीलवाड़ा ले जाया गया। वहां बताया कि बैंक खाता अपडेट करना उनका कार्य नहीं है और इसके लिए जिला क्षय अधिकारी की ओर से निदेशालय विशेष योग्यजन को पत्र लिखा जाएगा। इसके बाद परिवार ने फिर जिला क्षय अधिकारी से संपर्क किया, लेकिन वहां से भी यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया गया कि यह कार्य उनके विभाग का नहीं है।
शिकायतें एक-दूसरे विभाग में होती रहीं फॉरवर्ड
इसके बाद परिवार की ओर से निदेशालय विशेष योग्यजन में भी 181 के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई। परिवार का आरोप है कि वहां भी समस्या का समाधान करने के बजाय शिकायत को संतुष्टि के लिए बंद करने का प्रयास किया जाता है और असंतुष्ट होने पर शिकायत फिर जिला क्षय अधिकारी के पास फॉरवर्ड कर दी जाती है। इस तरह पीड़ित परिवार की शिकायत पिछले करीब तीन महीने से एक विभाग से दूसरे विभाग तक घूम रही है, लेकिन बैंक खाता अपडेट नहीं हो सका और सहायता राशि भी खाते में नहीं पहुंची।
परिवार में तीन सदस्य, बेटे की मजदूरी से चल रहा घर
पीड़ित परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है। परिवार में पति-पत्नी और एक पुत्र है। पुत्र मजदूरी कर किसी तरह अपने पिता के लिए दवाइयों का इंतजाम करता है। पत्नी दिन-रात अपने बीमार पति की सेवा में लगी हुई है। घर की हालत ऐसी है कि नियमित इलाज का खर्च उठाना भी परिवार के लिए मुश्किल है। ऐसे में सरकार की ओर से मिलने वाली 3 लाख रुपए की सहायता राशि ही इस परिवार के लिए बड़ी उम्मीद बनी हुई है।
'पैसा मिलने तक बहुत देर न हो जाए'
पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि सिलिकोसिस योजना की सहायता राशि समय पर मिल जाए तो वे किसी अच्छे अस्पताल में जाकर इलाज करा सकते हैं। परिवार को सबसे बड़ा डर यह सता रहा है कि कहीं सरकारी सहायता मिलने में इतनी देर न हो जाए कि इलाज का मौका ही हाथ से निकल जाए।