प्रकृति की गोद में आस्था का धाम खोरड़िया माता मंदिर: बिजौलिया से 7 किमी दूर, सालभर बहती कुई और विशाल अर्जुन के पेड़ बने आकर्षण का केंद्र
ललित चावला बिजौलिया | 13 Aug 2026
सड़क व बिजली सुविधा मिले तो पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो
बिजौलिया। बरसात का मौसम शुरू होते ही बिजौलिया क्षेत्र के धार्मिक एवं प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर रौनक बढ़ गई है। जोगनियां माता, मेनाल, भड़क, झरिया महादेव, सेवन फॉल जैसे प्रसिद्ध स्थलों पर बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंच रहे हैं। वहीं क्षेत्र में कई ऐसे प्राकृतिक एवं धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं, जो खूबसूरती और आस्था के लिहाज से किसी पर्यटन स्थल से कम नहीं हैं, लेकिन जानकारी और आवागमन की सुविधा के अभाव में इनकी पहचान सीमित क्षेत्र तक ही सिमटी हुई है।
ऐसा ही एक अनोखा धार्मिक स्थल बिजौलिया से करीब 7 किलोमीटर दूर बिजौलिया खुर्द पंचायत के तीखी गांव में स्थित प्राचीन खोरड़िया माता मंदिर है। खास बात यह है कि यह मंदिर प्रसिद्ध झरिया महादेव मंदिर से महज एक किलोमीटर की दूरी पर जंगल और हरियाली के बीच स्थित है। प्राकृतिक वातावरण, प्राचीन मंदिर और लगातार बहते पानी की वजह से यह स्थान बरसात के दिनों में विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
प्राचीन प्रतिमा और पानी की कुई आस्था का केंद्र
स्थानीय रामराज मीणा का कहना है कि मंदिर में स्थापित माता की प्रतिमा प्राचीन है। मंदिर परिसर में बनी एक छोटी सी कुई भी यहां का प्रमुख आकर्षण है। ग्रामीणों के अनुसार इस कुई में लगभग वर्षभर पानी बहता रहता है। श्रद्धालु इसे माता का चमत्कार मानते हैं। कुई के पानी का उपयोग ग्रामीण आसपास के खेतों में रबी की फसल की सिंचाई के लिए भी करते हैं। प्राकृतिक रूप से लगातार पानी का उपलब्ध होना इस स्थान को धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक दृष्टि से भी खास बनाता है। वर्तमान में मंदिर की पूजा गांव के भील परिवार के किशन भील द्वारा की जा रही है।
विशाल अर्जुन का पेड़ और चारों तरफ हरियाली
मंदिर परिसर में मौजूद विशाल अर्जुन के वृक्ष इसकी सुंदरता को और बढ़ाते है। चारों तरफ फैली हरियाली और जंगल के बीच स्थित मंदिर का शांत वातावरण यहां आने वाले श्रद्धालुओं को अलग ही अनुभूति देता है। बरसात के दिनों में जब आसपास की पहाड़ियां और जंगल हरियाली की चादर ओढ़ लेते हैं, तब खोरड़िया माता मंदिर का प्राकृतिक सौंदर्य देखते ही बनता है। शहर और कस्बों की भीड़भाड़ से दूर यह स्थान प्रकृति और धार्मिक आस्था के बीच सुकून तलाशने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
ग्रामीणों ने कराया मंदिर का निर्माण
ग्रामीणों की आस्था को देखते हुए कुछ वर्ष पूर्व यहां माता के मंदिर का निर्माण कराया गया। स्थानीय श्रद्धालु समय-समय पर यहां दर्शन करने पहुंचते हैं। हालांकि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में यह स्थल अभी व्यापक स्तर पर लोगों की पहुंच से दूर है।
पक्की सड़क नहीं होने से बारिश में बढ़ जाती है परेशानी
खोरड़िया माता मंदिर तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में रास्ता खराब हो जाता है। यही वजह है कि आसपास के लोग इच्छा होने के बावजूद बड़ी संख्या में मंदिर तक नहीं पहुंच पाते। मंदिर परिसर में वर्तमान में बिजली की व्यवस्था भी नहीं है। यदि यहां विद्युत कनेक्शन, प्रकाश व्यवस्था और रास्ते की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो श्रद्धालुओं के साथ-साथ पर्यटकों की आवाजाही भी बढ़ सकती है।
तीन रास्तों से पहुंचा जा सकता है
खोरड़िया माता मंदिर तक पहुंचने के लिए अलग-अलग मार्ग उपलब्ध हैं। बिजौलिया से थड़ौदा होते हुए तीखी गांव पहुंचा जा सकता है। वहीं छोटी बिजौलिया से झरिया महादेव होते हुए भी मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा श्यामपुरा से रूपपुरा होते हुए भी यहां पहुंचने का रास्ता है।
प्रचार-प्रसार और सुविधाएं मिलें तो बन सकता है पर्यटन स्थल
खोरड़िया माता मंदिर में धार्मिक आस्था के साथ-साथ प्राकृतिक खूबसूरती का अनूठा संगम है। प्राचीन माता की प्रतिमा, सालभर बहती पानी की कुई, विशाल अर्जुन वृक्ष और जंगल की हरियाली इसे खास बनाती है। यदि प्रशासन और पंचायत स्तर पर मंदिर तक पक्की सड़क, बिजली, प्रकाश व्यवस्था और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा इसका प्रचार-प्रसार किया जाए तो झरिया महादेव आने वाले पर्यटकों के लिए खोरड़िया माता मंदिर भी एक नया आकर्षण बन सकता है।