700 साल पुराना नला का माताजी मंदिर: जहां मन्नत पूरी होने पर चढ़ाए जाते हैं चांदी और लकड़ी के पालने, नवरात्र में उमड़ रहे भक्त

ललित चावला बिजौलिया | 13 Oct 2026

जहां मन्नत पूरी होने पर चढ़ाए जाते हैं चांदी और लकड़ी के पालने, नवरात्र में उमड़ रहे भक्त

बिजौलिया। कस्बे से करीब 6 किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर पहाड़ी के बीच स्थित नला का माताजी मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस प्राचीन मंदिर में शारदीय नवरात्र के दौरान दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। बिजौलिया, हाड़ौती, बरड़ क्षेत्र, डाबी-बुधपुरा सहित मध्यप्रदेश के भक्तों के लिए इस मंदिर का विशेष धार्मिक महत्व है। नवरात्र के अवसर पर मंदिर में पूजा-अर्चना, महाआरती, रामायण पाठ, दुर्गा पाठ और शाम को डांडिया रास के आयोजन से वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।

700 साल पुराना है मंदिर का इतिहास

मान्यता के अनुसार, नला का माताजी मंदिर का इतिहास करीब 700 वर्ष पुराना है। कहा जाता है कि माता ने स्वप्न में मंदिर के पहले पुजारी को पहाड़ी की गुफा से मूर्ति लाकर स्थापित करने का आदेश दिया था। इसके बाद यहां माता की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरू की गई। स्थानीय मान्यता के अनुसार, पहले पुजारी को प्रतिदिन पूजा के बाद धूपदान के नीचे चांदी का सिक्का मिलता था। तभी से मंदिर में पूजा की परंपरा चली आ रही है। बताया जाता है कि पहले पुजारी के वंशज पीढ़ी-दर-पीढ़ी मंदिर की सेवा करते आ रहे हैं। वर्तमान में कामां गांव के किशन भील मंदिर में पुजारी हैं।

मन्नत पूरी होने पर चढ़ाते हैं पालना

नला का माताजी मंदिर में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। मान्यता है कि माता की पांति मिलने पर भक्तों की मनोकामना पूरी होती है। विशेष रूप से संतान की कामना रखने वाले दंपती यहां माता के दर्शन कर मन्नत मांगते हैं। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु माता के दरबार में चांदी या लकड़ी का पालना भेंट करते हैं। इसी परंपरा के चलते मंदिर परिसर में सैकड़ों चांदी और लकड़ी के पालने लटके हुए हैं, जो श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक हैं।

पहाड़ी पर मंदिर, नीचे बहता है बरसाती नाला

मंदिर की भौगोलिक स्थिति भी इसे विशेष पहचान देती है। पहाड़ी पर स्थित मंदिर के नीचे बरसाती नाला बहता है। नाले के ऊपर पहाड़ी पर विराजित होने के कारण ही इसे नला का माताजी मंदिर कहा जाता है। चारों ओर प्राकृतिक वातावरण और पहाड़ी की सुंदरता श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। 

मंदिर कमेटी के शंकर धाकड़ ने बताया कि शारदीय नवरात्र के दौरान दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। मंदिर में प्रतिदिन माता की महाआरती की जा रही है। इसके साथ ही रामायण और दुर्गा पाठ का आयोजन हो रहा है। शाम के समय डांडिया रास में श्रद्धालु उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं। नवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का महत्व रहता है और भक्त माता के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

पैदल यात्रा कर पहुंचते हैं श्रद्धालु, भोजन और आवास की नि:शुल्क व्यवस्था

नवरात्र के दौरान कई श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पैदल यात्रा कर मंदिर पहुंचते हैं। मंदिर कमेटी की ओर से यात्रियों और श्रद्धालुओं के लिए भोजन तथा ठहरने की नि:शुल्क व्यवस्था की गई है। लंगर में भक्तों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

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