श्रीमद्भागवत कथा का समापन: गुरुदेव प्रेमनारायण महाराज ने कहा-अंतिम समय में भगवान का स्मरण ही जीव को परम धाम ले जाता है
ललित चावला बिजौलिया | 04 Oct 2026
बिजौलिया। क्षेत्र में सात दिनों से चल रहे संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आज हवन-पूर्णाहुति के साथ भव्य समापन हुआ। सात दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान के अंतिम दिन श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। कथा के अंतिम सोपान में हवन कुंड में विधि-विधान से आहुतियां दी गईं और क्षेत्र की शांति, समृद्धि तथा खुशहाली की कामना की गई।
मंत्रोचार के साथ दी गईं आहुतियां
समापन कार्यक्रम के अवसर पर आयोजक मंडल के अध्यक्ष सुगन लाल धाकड़ एवं मंडल के अन्य सदस्यों ने वेदमंत्रों के उच्चारण के बीच हवन कुंड में अग्नि के समक्ष आहुतियां समर्पित कीं। कथा के सातवें एवं अंतिम सोपान में कथा व्यास गुरुदेव प्रेमनारायण महाराज ने कहा कि मनुष्य की जैसी अंत मति होती है, वैसी ही उसकी गति होती है। जीवन के आखिरी क्षणों में व्यक्ति जिसे याद करता है, आत्मा को वैसी ही गति प्राप्त होती है।
महाराज ने सचेत करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में बहुत सावधान रहने की आवश्यकता है। यदि अंतिम समय में किसी जानवर का ध्यान करोगे या शरीर छोड़ते वक्त उसकी चिंता रखोगे, तो अगले जन्म में वही रूप पाना पड़ेगा। इसलिए सदा श्री हरि (भगवान) को याद करें, जिससे भगवान के परम धाम में स्थान प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि इंसान को दुनियादारी के बजाय हरि (ईश्वर) से अपनी जोड़ी बनानी चाहिए, क्योंकि केवल भगवान की जोड़ी ही अमर और सनातन है।
सात दिनों तक चले इस भव्य धार्मिक महोत्सव में आसपास के लगभग 25 से 30 गांवों से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर धर्म लाभ उठाया। पूर्णाहुति के उपरांत आयोजक मंडल द्वारा प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया।
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