विश्व पर्यावरण दिवस विशेष 2026: जब हरियाली और रास्ते खुशहाली की गाथा कहेंगे

ललित चावला बिजौलिया | 05 Jun 2026

 जब हरियाली और रास्ते खुशहाली की गाथा कहेंगे

बिजौलियां की पहचान और प्रकृति का स्वर्णिम दौर

बिजौलिया (एम रेडवाल)। विराट वृताकार दीवार में बसी, तंग गलियों, खूबसूरत घरों और लोगों वाली बिजौलियां। यहां कुएं और बावड़ियां केवल कंठों को ही तर नहीं करते, इन धरा की धमनियों में पहचान जिंदा थी बिजौलियां की। बांध ने बिजौलियां की बंजर काया का श्रृंगार किया, नदियों की रवानी और तालाबों का तो अपना जलवा था ही। दशकों पहले का बहुत शांत, सरल और सौम्य जीवन, जब धीरज, फुरसत और सादगी ज्यादा थी और कोलाहल, धूम-धड़ाका और आपाधापी कम थी। उस दौर की जलवायु और पारिस्थितिकी जीव जगत की मददगार थी।
जंगल की प्रचुरता थी। कंक्रीट के जंगल और वाहनों की रेलमपेल कम थी। पलाश के फूलों का केसरिया रंग कहीं भी नज़र आ जाता था।

मेनाल का विश्व प्रसिद्ध झरना

मेनाल का विश्व प्रसिद्ध झरना

बदलते दौर में बदली तस्वीर

दशकों बाद बदलते दौर ने तस्वीरें बदली, जंगल खिसका, घरों और जंगलों में जानवर घटे। तकनीक, मशीनीकरण और बाजार की मचाई उथल-पुथल ने धरती की सांसें फुलाई। देखते-देखते मानव जीवन की दशा और दिशा ही बदल गई।

संरक्षण के प्रयास और चुनौतियां

वक्त के साथ जल, जीव और जंगल बचाने के जतन भी चले। सरकारी और सामूहिक प्रयास भी हुए। सामाजिक संगठनों और पर्यावरण प्रेमियों की भूमिकाएं प्रशंसनीय रही।
रामगढ़ विषधारी अभयारण्य वजूद में आया तो वर्षाजल संचय, वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अपनाकर किया जाने लगा। और भी जो जरूरी दीख पड़े सब जतन किए ही गए। लेकिन धरती की जरूरत के मुताबिक तो अभी लंबे और लगातार प्रयासों की आवश्यकता है।

विश्व पर्यावरण दिवस की सार्थकता

विश्व पर्यावरण दिवस की सार्थकता भी तभी है जब जंगल, नदियां, झरने, बांध, बारिश, जंगली और पालतू जीव न केवल बचे रहें बल्कि बढ़ते भी रहे, सुरक्षित भी रहे। वर्षाजल संग्रहण के जतन और अधिक हों। ऊर्जा संरक्षण और प्राकृतिक ऊर्जा उत्पादन में सक्रिय सहभागिता बनाई रखी जाए। पर्यावरण संरक्षण के लिए की जाने वाली हर गुहार को गंभीरता से लिया जाए।

जलवायु परिवर्तन : बढ़ता वैश्विक संकट

वैश्विक ताप से धरती की गरमी बढ़ रही है। एक डिग्री का ताप पारिस्थितिकी तंत्र को हिलाकर रख देता है, जो बढ़ चुका है। जानकार बताते हैं कि इसको 1.5 डिग्री होने से रोकना है, नहीं तो धरती और मानव जीवन का संकट बढ़ जाएगा। यह संकट इतना बड़ा है कि हर साल इसके समाधान पर चर्चा के लिए पूरी दुनिया एकजुट होती है। 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा स्टॉकहोम सम्मेलन में घोषणा के बाद 1973 से विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है।

विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम

इस बार विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम "प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिए। हमारे भविष्य के लिए।" रखी गई है।

इस बार अज़रबैजान देश के बाकू में विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की मेजबानी हो रही है। भारत की ओर से पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के मंत्री, अधिकारी और जलवायु प्रतिनिधि वैश्विक मंच पर जलवायु परिवर्तन पर भारत की पहल कर रहे हैं। सुझाव और समाधान की राहें तलाश रहे हैं।

हमारी भी है जिम्मेदारी

वैश्विक संकट टालने में हमारी भी हिस्सेदारी होनी ही चाहिए। धरती बचाने के संकल्प के हमारे छोटे-बड़े हर प्रयास मायने रखेंगे। इनसे हम धरती की हरियाली और खुशहाली बचा लेंगे, बढ़ा लेंगे। इतना विश्वास और हौसला होना ही चाहिए।

 

 

 

बिजौलिया मंडोल डेम के समीप पहाड़ी पर चट्टानों की अद्भुद कृतियां

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जानवर के रूप में प्राकृतिक रूप से बनी चट्टान

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