न नंबर, न इंश्योरेंस : आखिर पुलिस और परिवहन विभाग क्यों मेहरबान?
ललित चावला बिजौलिया | 03 Jun 2026
बिजौलिया में मौत बनकर घूम रहे ओवरलोडेड वाहन
बिजौलिया क्षेत्र में बिना नंबर और नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रहे हैवी वाहनों ने आमजन की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है। पत्थर खदानों में कंडम और बिना पंजीकरण वाले ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खुलेआम परिवहन कार्य में लगी हुई हैं। सेंड स्टोन और खदानों के वेस्टेज से ओवरलोडेड वाहन अब बिजौलिया कस्बे की सड़कों पर भी बेखौफ दौड़ रहे हैं। लगातार हो रहे सड़क हादसों के बावजूद परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बिजौलिया सर्विस लेन पर मंगलवार रात दौड़ता ओवरलोडेड वाहन
एक दर्जन से अधिक खनन क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी
अदालत के सामने स्थित सड़क पर सेंड स्टोन से भरा बिना नंबरी वाहन बेरोकटोक गुजरते हुए
बिजौलिया, मकरेड़ी, सतकुड़िया, आंट, भूती, उद्पुरिया सहित क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक खनन इलाकों में बिना नंबर के वाहन खुलेआम संचालित हो रहे हैं। इन वाहनों के जरिए खदानों का वेस्टेज और काली मिट्टी ओवरलोड कर डंपिंग स्थलों तक पहुंचाई जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर ठेकेदारों की मिलीभगत से खदानों की मिट्टी का अवैध कारोबार भी फल-फूल रहा है, जिससे राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
संदिग्ध बाहरी वाहनों और चालकों के उपयोग के आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि कई वाहन इतने जर्जर हैं कि उनके पास वैध दस्तावेज तक नहीं हैं, फिर भी वे दिन-रात परिवहन कार्य में लगे हुए हैं। कुछ वाहनों के चोरी के होने की भी आशंका जताई जा रही है। बेरीसाल गांव में कथित रूप से एक ऐसा कार्यालय संचालित होने की चर्चा है, जहां बिना नंबर और कंडम वाहनों को खनन कार्य में लगाने की व्यवस्था की जाती है। साथ ही मारवाड़ क्षेत्र से आए कई बाहरी और संदिग्ध व्यक्तियों को चालक के रूप में कार्य पर लगाए जाने की बात भी सामने आ रही है।
बिना इंश्योरेंस के दौड़ रहे ट्रैक्टर, कार्रवाई का इंतजार
कस्बे में पत्थर स्टॉक से फर्शी भरकर लाने वाले कई ट्रैक्टर बिना वैध बीमा (इंश्योरेंस) के संचालित हो रहे हैं। ये वाहन मुख्य सड़कों और आबादी वाले क्षेत्रों से तेज गति से गुजरते हैं, जिससे हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि परिवहन विभाग और पुलिस की उदासीनता के कारण नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। लोगों ने प्रशासन से ऐसे वाहनों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है।