अब सहेजी जाएगी बिजौलिया की प्राचीन धरोहर: 1970 से पूर्व की पांडुलिपियों का होगा डिजिटलीकरण
ललित चावला बिजौलिया | 27 May 2026
बिजौलिया (एम रेडवाल)। कस्बे और आसपास के क्षेत्र में छिपी प्राचीन ज्ञान-संपदा को संरक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत की गई है। भारत सरकार की पहल और जिला प्रशासन के निर्देश पर बिजौलिया में वर्ष 1970 से पूर्व की दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण का कार्य शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत कागज़, कपड़े, भोजपत्र, ताम्रपत्र और अन्य माध्यमों पर लिखी ऐतिहासिक पांडुलिपियों को सुरक्षित कर डिजिटल स्वरूप दिया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस अमूल्य धरोहर से जुड़ सकें।
प्राचीन इतिहास को डिजिटल किया जाएगा
मुख्य ब्लाॅक शिक्षा अधिकारी मालीराम यादव और ग्राम प्रभारी सुलेश कुमार चित्तौडा़ ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित ‘ज्ञान भारतम्’ अभियान के अंतर्गत प्राचीन हस्तलिखित ग्रंथों, ताड़पत्रों और दुर्लभ अभिलेखों को संरक्षित करने की दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, इतिहास और प्राचीन ज्ञान परंपरा को नष्ट होने से बचाकर डिजिटल रूप में सुरक्षित करना है। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति, परिवार, मंदिर, मठ, आश्रम, गुरुद्वारा, देवरा, बाबा की धूणी, पुस्तकालय, संग्रहालय या निजी संग्रह में कोई पुरानी पांडुलिपि उपलब्ध हो तो उसकी जानकारी ‘ज्ञान भारतम् (Gyan Bharatam)’ ऐप के माध्यम से दर्ज कराई जा सकती है। इसके अलावा प्रभारी सुलेश चित्तौड़ा से संपर्क कर भी जानकारी दी जा सकती है।
पांडुलिपियों के फोटो शेयर कर एप पर सुरक्षित करें
अभियान के तहत पांडुलिपियों के स्पष्ट फोटो, प्राप्ति स्थल की तस्वीरें तथा संबंधित जानकारी भी मांगी जा रही है। इसमें पांडुलिपि रखने वाले व्यक्ति या संस्था का नाम, स्थान, अनुमानित प्राचीनता और विषय जैसे धर्म, इतिहास, साहित्य अथवा दर्शन आदि का उल्लेख किया जा सकता है। पांडुलिपि चाहे कागज़, भोजपत्र, वृक्ष की छाल, धातुपत्र या किसी अन्य माध्यम पर लिखी हो तथा किसी भी प्रकार की स्याही या रंग से अंकित हो, उसकी तस्वीरें साझा की जा सकती हैं।
ऐतिहासिक ताम्रपत्रों और पांडुलिपियों को सुरक्षित करने का अभियान चलाया
बता दें कि 21 मई से शुरू हुए इस अभियान में अब तक बिजौलिया में अति प्राचीन 10 ताम्रपत्र और 4 पांडुलिपियां का कलेक्शन किया गया है। बिजौलिया ब्लॉक की 21 ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रभारी बनाकर इतिहास को सहेजने का काम किया जा रहा है। आमजन से अपील की गई है कि वे अपनी पुरानी धरोहरों को नष्ट होने से बचाने के लिए आगे आएं और इस अभियान से जुड़कर इतिहास के इन अनमोल ज्ञान-मोतियों के संरक्षण में भागीदारी निभाएं।